
चयन व प्रस्तुतिः
आशीष सिंह
छठे दशक के महत्वपूर्ण कहानीकार रामनारायण शुक्ल को हिन्दी का साहित्य समाज़ लगभग भूलने लगा था तभी ‘अक्षरों के बीच’ एक किताब आई। इसमें उनकी लगभग सारी कहानियाँ और कुछ उनके मित्रों द्वारा लिखे कुछ संस्मरण…उनकी कहानियाँ बताती हैं कि कहानी स्पीड में नहीं चलती, बल्कि उसमें एक ठहराव चाहिए। एक साथ सबको हँसते देखने का स्वप्न देखने वाले इस लेखक की किताब को अवश्य पढ़ना चाहिए।

