
लेखकः
विवेक आसरी
अगर आप समाज में या सिस्टम में ‘मिसफिट’ हैं तो वही सिस्टम या तो आपको ‘एलीमिनेट’ कर देगा या पागल कर देगा। सेना को सिस्टम का प्रतीक बनाकर विवेक ने यह नाटक लिखा है, इसे पढ़कर आप सिस्टम को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इससे पहले भी विवेक इंसाफ़ एक सीधी रेखा में न्याय से जुड़ सवाल उठा चुके हैं।

