- मुहर
गोडसे को मिली
नौकरी डाकघर में
तो वह खुशी से फूला न समाया
अब रोज रोज
मिलेगा मौका पीटने का
गांधी को
धातु की भारी मुहर से।
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2. कुल्हाड़ी
हिन्दू कुल्हाड़ी
बोली मुस्लिम कुल्हाड़ी से :
खून जो हमने पिया आज
उसका स्वाद एक जैसा ही था।
3. गीता
गांधी पढ़ते थे गीता
बगैर नागा हर रोज़
और रखते थे अपने पास हमेशा
बिल्कुल यही करता था
गोडसे भी।
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अनुवादक – यादवेन्द्र (मलयालम से अमृत लाल के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित)

