हनन-अल-शेख

बूढ़ा आदमी मेज के पास खोया-खोया सा खड़ा था। मेज के पीछे बैठे व्यक्ति को वह अपनी पिचकी हुई आंखों से एकटक देखे जा रहा था. फिर उसने हाथ उठाकर अपने माथे और झुर्रियों से भरे चेहरे से पसीना पोंछा. उसकी कनपटी और गर्दन से पसीने की बूंदें टपक रही थीं फिर भी उसने रुमाल या सिर पर बंधे स्कार्फ का इस्तेमाल नहीं किया. उसने मेज के पीछे बैठे व्यक्ति के सवाल का भी जवाब नहीं दिया जो बार-बार उससे पूछ रहा था कि “वह क्यों अस्पताल के हर वार्ड का दरवाजा खोलकर अपनी बीवी को खोज रहा था? क्यों नहीं वह सीधे पूछताछ काउंटर पर आया?” बूढ़ा खामोश रहा. हालांकि मेज के पीछे बैठा कर्मचारी एक के बाद एक दराज खोलकर कुछ ढूंढ़ रहा था. बूढ़ा उसे ऐसा करते हुए देखता रहा, फिर बोला, “मैं दो रोज पहले ही यहां आ गया था और अस्पताल खोजते- खोजते कल यहां पहुंचा, तब से अपने बच्चों की अम्मी को ढूंढ़ रहा हूं. मेज के पीछे बैठा शख्स चिढ़कर बड़बड़ाने लगा, उसे ख़ुद पर ही गुस्सा आ रहा था कि अब तक उसने सही सवाल करना या बातचीत करना नहीं सीखा है. उसके सवाल लंबे, चिड़चिड़े होते हैं, इसलिए असरदार नहीं होते. सिगरेट का कश खींचकर उसने उत्तेजित होकर पूछा, “आपकी बीवी का नाम क्या है?’ बूढ़े आदमी ने तुरंत बताया, ‘जेनब मोहम्मद.’ मेज के पीछे बैठा आदमी तेजी से मोटी बही के पन्ने पलटने लगा. हर बार जैसे ही वह पन्ना पलटता तो कागज़ की चर्रमर्र होती जो प्रतीक्षा कक्ष में बैठा हर व्यक्ति सुन सकता था. वह बही के पृष्ठ पलटता रहा, बीच- बीच में बड़े बेमन से अपने होंठ सिकोड़ लेता, कभी बेचैन होकर बही को अपने मुंह के करीब ले आता, यह
काफी देर चलता रहा. आखिरकार वह बोला, “हां, आपकी बीवी दो दिन पहले यहां आई थी?” बूढ़े ने राहत महसूस करते हुए तुरंत कहा, “हाँ सर, जब उसकी सांस रुक गई थी.” मेज के पीछे बैठा श़ख्स एक बार फिर चिढ़कर बोला, भई यदि उसकी सांस रुक गई होती तो न वह होती और न ही तुम. फिर बही में देखते हुए वह बोला, & वह वार्ड नं 4 में है पर आपको भीतर जाने की इजाजत नहीं है, क्योंकि वह जनाना वार्ड है, वहां कई सारी औरतें हैं. उसने दीवार से पीठ टिकाकर खड़ी एक नर्स को पुकारा जो उबासियां ले रही थी. वह मेज़ के करीब आई, हाथ में कागज़ का कप थाम रखा था, जिसमें से वह कुछ पी रही थी. उस आदमी की तरफ इशारा कर मेज के पीछे वाले शख्स ने बताया, वार्ड नं 4 – ‘जेनब मोहम्मद.’
नर्स कप से घूंट भरते हुए आगे-आगे चलती रही. बूढ़ा सोचता रहा कि यह नर्स अरबी बोलती है, फिर वह कैसे इतने मर्दों के साथ अस्पताल में काम करती है. वार्ड के करीब पहुंचकर नर्स ने उसे बाहर ही रुकने का इशारा किया; फिर कुछ देर बाद वह बाहर आई और बोली, अंदर जेनब मोहम्मद नाम की दो महिलाएं हैं. उनमें से एक को केवल एक आंख से दिखता है, कौन-सी तुम्हारी बीवी है, बताएं तो मैं उसे बाहर बुलाऊं? बूढ़ा दुविधा में पड़ गया, एक आंख? मुझे क्या पता? उसने याद करने की कोशिश की कि जेनब कैसी दिखती है, काले, लंबे बुरके में सिर से पांव तक ढंकी, कभी-कभार काले रंग का कपड़ा गर्दन से सिर तक लपेटा या गर्दन पर कसा हुआ. उसने अपनी बीवी की बैठे हुए और चलते हुए भी कल्पना की. उनके पहले बच्चे को खाना खिलाते हुए उसकी छवि को याद करने की कोशिश की, एक आंख – मुझे क्या पता. मैंने तो कभी ग़ौर ही
नहीं किया. उसे बिस्तर पर लेटी अपनी बीवी की छवि भी याद आई, जिसमें उसकी आंखें बंद थीं. बूढ़ा दुविधा में पड़ गया और बोला, “यदि मैं उसे आवाज दूंगा तो वह मेरी आवाज़ पहचान लेगी।.'' नर्स को संदेह हुआ कि वह वाकई अपनी बीवी से मिलने आया है. नर्स को उसे इस दुविधा में फंसा देख हंसी आ गई, उसने जानना चाहा, “आप दोनों का निकाह हुए कितने बरस हुए हैं?वह फिर असमंजस से भर बोला, अल्लाह ही जानता है—शायद तीस या चालीस बरस…..?
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अनुवादः अनुराधा महेन्द्र
हनन-अल-शेख
लेबनानी उपन्यासकार, कहानीकार और नाटककार हनन अल शेख को अरबी लेखकों में एक अग्रणी समकालीन महिला लेखिका के रूप में ख्याति प्राप्त है. उनका रचनाकर्म समाज में महिलाओं की भूमिका, स्त्री-पुरुष संबध और विवाह प्रथा से जुड़े विषयों पर केंद्रित रहा है. रोशनी विहीन आंख के संबंध में लेखिका का कहना है। इस कहानी के ज़रिए मैं बताना चाहती हूं कि लोग रिश्तों को लेकर किस कदर बेपरवाह होते हैं, कुछ पुरुष होते हैं जो उस स्त्री के बारे में कुछ भी जानने की ललक नहीं रखते जिनके साथ वे पूरी ज़िन्दगी गुजारते हैं, जबकि मैं नहीं समझती कि कोई भी स्त्री ऐसा कर सकती है, स्त्री अपने जीवनसाथी के हर हाव-भाव, नैन नक्श, रंग-ढंग को बखूबी जानती है, चाहे वह उसे पसंद करना ही क्यों न छोड़ दे.
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अनुराधा महेन्द्र

विश्व के अमर कथाकार, कहानियों से गुज़रती बीसवीं सदी, नोबेल पुरस्कार प्राप्त चर्चित कहानियों के अनुवादों का संग्रह, स्टीफन ज्विग के उपन्यास, ‘ बिवेयर आफ पिटी’ का ‘कायर’ शीर्षक से अनुवाद. कई वर्षों से पत्र पत्रिकाओं में लेखन.
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