1. सबसे छोटी चूड़ियां
बिना लपट का
काला धुआं बड़ा गहरा है
किस से पूछें कि
बीजों की खातिर
किसने बनाए बिछौने
बेटियों का होना इस कदर
नागवार है लोगों को
कि ढूंढना पड़ती है बेटियां
धुआं ही नहीं सन्नाटा भी है
आवाज नहीं है पायल की
बरसों से नहीं बिक रही हैं
सबसे छोटी चूड़ियां
लगता है कभी भी जलने लगेंगे
धरती जंगल दरिया और पहाड़
फैलती जाएगी
बिना धुएं वाली अजीम आग
कब्रों से बाहर आएँगे लोग
कौन सी नियामत झुठला दी जाए
शायद फट पड़े आसमान
और झरने लगे
गुलाब के फूलों सी बेटियां
2. दुनिया से गायब होकर कहा मिलोगी बेटियों
हमारी पकड़ से बचती रहना
हमारी पकड़ में पाप है
तुम छटपटाओ
दम तोड़ दो
बच जाओ तो हम
पहना सकते हैं
तुम्हारे नन्हें पांवों में
लोहे के जूते
सूखे होठों पर जीभ फेरती
देखती हो
माँ के दूध की धार
दुखांत कथा की नायिकाओं
पी क्यों नहीं जाती
समुद्र का जल
सोती होंगी तुम्हारे गर्भ में
अनागत सभ्यताएं
कैसी लपटों में जलता है देश काल
हमने ज्वालामुखियों के मुहाने में
सिर डाल दिए है
इस दुनिया से गायब हो कर
फिर कहा˙ मिलोगी बेटियों
3. कहरवा
पहाड़ों से उतरती
नदियां गा रही थी
किरणों के तार पर
हवाओं की उंगलियाँ
बज रहा था
षड्ज और पंचम
यह जो
स्पंदित हो रहा है
भीतर कहरवा
धा गे ना ती
ता गे धि ना
4. आनंद भैरव
उन्नत शिखरों से चले आ रहे हैं
वेगवान रथों में बैठकर
तेजस्वी मरुद्गण
भूमा का वस्त्र
लहरा रहा है
उषाए’ रास्ता बनाती है
सूर्य के लिए ,
कौन भर रहा है
बादलों में जल ,
गायों के थनों में दूध ,
फलों में रस और
वनस्पतियो में कल्याण
पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच
किसकी प्रार्थनाओं से
फूट पड़ी है पत्थरों से जलधार
और नदियाँ चली जा रही है
सागर की ओर लगातार
आरोह में बज रहे हैं
छः स्वर
सा रे ग म प म ध प सा
कोई गा रहा है आनंद भैरव
5. हम जैसे ही होते हैं
हम जैसे ही होते हैं केंद्रक
वे जब भी निकट आते हैं
उनकी अदम्य छटपटाहट व
बेचैनी उन्हें झकझोरती है
या तो वे मिल जाते हैं
और विस्फोट हो जाता है
या टूट जाते हैं
और विस्फोट हो जाता है
उतना ही भयंकर
जितना मिलने पर होना था
वीणा सिन्हा
पेशे से चिकित्सक और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ वीणा सिन्हा ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहते हुए सेवाएं प्रदान की और निरंतर कविता, कहानी और उपन्यास लिखती रहीं. औरों के जीवन को संरक्षित और बेहतर करने की यात्रा के दौरान लेखन को नया आयाम और धार मिली. अब तक चौदह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.

