
लेखकः इवान तुर्गनेव
अनुवादः नेमिचन्द जैन
1896 में प्रकाशित इस उपन्यास में जारकालीन रूस का क्रांतिकारी आंदोलन और उसमें शामिल ऐसे
युवा हैं जो कुँआरी धरती पर क्रान्ति के बीज बोना चाहते हैं।

लेखकः इवान तुर्गनेव
अनुवादः नेमिचन्द जैन
1896 में प्रकाशित इस उपन्यास में जारकालीन रूस का क्रांतिकारी आंदोलन और उसमें शामिल ऐसे
युवा हैं जो कुँआरी धरती पर क्रान्ति के बीज बोना चाहते हैं।