
लेखकः
सविता पाठक
पूँजीमुँहा समय, सत्तालोलुप समाज और संवेदनशील व्यवस्था की गुहार-सा यह उपन्यास पाठक की
संवेदना का स्पर्श करता है।

लेखकः
सविता पाठक
पूँजीमुँहा समय, सत्तालोलुप समाज और संवेदनशील व्यवस्था की गुहार-सा यह उपन्यास पाठक की
संवेदना का स्पर्श करता है।