विश्वकप फुटबॉल- असमिया

नीलिम कुमार

Nilim Kumar

भारतवर्ष, तुम्हारा एक हाथ काटा हिंदू ने
एक पैर काटा मुसलमान ने
विश्वकप फुटबॉल कैसे खेलोगे भारतवर्ष?

हे भारतवर्ष
खेल सकते थे तुम
भ्रष्टाचार का विश्वकप
खेल सकते थे तुम हिंसा-लूट।
गुजरात गुजरात
तुम तो कप्तान बन सकते थे।
खेल सकते थे सांप्रदायिकता का विश्वकप,
सांप्रदायिक भक्तों का प्रैक्टिस खत्म हुआ क्या? पूछो। पूछो

सपने में भी सोने के बूट जूते देखने का
अधिकार नहीं तुम्हारी संतान को
हे भारतवर्ष, हम कितने दुर्भाग्यशाली हैं!
किसने निकाल लिया हमारे सीने से हर्ष
किसने छीन लिए हमारे खेल के वस्त्र?
हम भी तो खेलते थे चकोतरा
फीफा क्या तुम यह जानते हो
बिल्कुल ब्राज़ील की तरह!

ब्राज़ील अब बहुत दूर निकल गया
कितनी दूर गया वो चकोतरा
टीवी के पर्दे पर समझ नहीं आता…

फिर भी विश्वकप फुटबॉल देखने जाऊँगा
हालाँकि मेरे सर्वांग में तुमुल रक्त-धार
हालाँकि मेरे सर्वांग में हिंसा की खरोंच
विश्वकप फुटबॉल देखने जाऊँगा।
मेक्सिको और कनाडा,
तुम्हारे रेलवे प्लेटफॉर्म पर
रात बिताने के लिए
क्या मेरे लिए दो फुट जगह नहीं होगी?

विश्वकप फुटबॉल देखने जाऊँगा
विश्वकप फुटबॉल देखने जाऊँगा
जहाँ पूरी दुनिया झुकेगी
जहाँ नाचेंगे खिलाड़ी देशों के झंडे
वहाँ मैं अपना तिरंगा
जेब में कैसे ले जाऊँगा?
भारतवर्ष हम कितने दुर्भाग्यशाली हैं
विश्व बैंक के भिखारी
तुम्हारा एक हाथ काटा हिंदू ने
एक पैर काटा मुसलमान ने

फिर भी विश्वकप फुटबॉल देखने जाऊँगा
मैं तुम्हें दूर से ही पहचान लूँगा
हे किलियन एमबाप्पे, सोने के बूट के अधिकारी।
पहचान लूँगा लियोनेल मेस्सी और
रोनाल्डो, तुम्हें भी…
तुम मेरे खून में बसते हो
तुम्हारी चाल-ढाल की परिभाषा जानता हूँ मैं।
मुझे फुटबॉल बहुत पसंद है
मुझे ताकतवर फुटबॉल पसंद है
क्रिकेट जैसा निकम्मा खेल नहीं!

कोका-कोला
तुम्हारे साथ नहीं जाऊँगा
विश्वकप देखने।
एडिडास
तुम्हारे संग भी नहीं जाऊँगा।
फीफा, क्या तुम मुझे एक फ्री टिकट दोगे
गैलरी के एक कोने में चुपचाप बैठूंगा
कोई मुझे पहचानेगा नहीं
मुँह पर पट्टी बाँध लूंगा
चाहूँ तो भारतीय हूँ
ये परिचय किसी को न दूँ।
फीफा, क्या तुम मुझे एक फ्री टिकट
दोगे?
दोगे बोलो

नहीं तो मैं चुपके से
चोर की तरह मैदान में घुस जाऊँगा।
एक फुटबॉल प्रेमी का ये अपराध
क्या तुम सजा दे सकोगे, फीफा?

चाहे मैं पहुँचूँ या न पहुँचूँ
मेक्सिको, कनाडा और अमेरिका
तुम मेरा स्वागत करने को तैयार रहो या न रहो
विश्वकप फुटबॉल देखने जाऊँगा।
याद रखना
गरीब देश भी फुटबॉल से प्यार करते हैं।
मेरे जैसा सबसे गरीब इंसान भी!
भारतवर्ष
तुम कुछ कहोगे?

तुम्हें यंत्रणा नहीं
तुम्हारा एक हाथ काटा हिंदू ने
एक पैर काटा मुसलमान ने
क्या तुम कभी भी
विश्व कप फुटबॉल नहीं खेल सकोगे भारतवर्ष?
नहीं खेल सकोगे?
नहीं खेल सकोगे?

***

अनुवाद – दिनकर कुमार

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