साठोत्तरी कहानी के प्रमुख हस्ताक्षर प्रगतिशील ज्ञानरंजन को उनकी कहानियों-पिता, घंटा, फेंस के इधर-उधर, के लिए तो जाना ही जाता है! उनके व्यक्तित्व के दूसरे पहलू भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं . उनके लिखे पत्र, उन्हें लिखे पत्र जीवन और साहित्य के अनेक दरवाज़े खोलते हैं. उनके द्वारा शुरू की गई ‘पहल’ कहानीकारों और कहानी को एक नयी दिशा देने का काम किया. वह भौतिक रूप से भले उपस्थित ना हों, उनकी वैचारिकता आज भी युवाओं को प्रेरित करती है. हमिंग वर्ड उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ उनके लेखन के विभिन्न पहलुओं पर यह संवाद:

