- मैकियावेलीय
बारिश के इस्त्री करने से पहले तक छतरी में कितनी परतें, जितना
चकलंग दीपक का प्रकाश विशुद्ध। विस्मृति का मोड़ा गया गोरैया स्मरण
ताम्बूल मुखरोचक या मुखरोधक? जो भी हो, “हमें भी एक दो।”
आईने में जो तिरछा बिखरा हुआ आवरण, अधेड़ रेलिंग पर तरल जिम्नास्टिक
का आनंद लेते-लेते अचानक लार फूँककर किससे कहा—केवल
थूक ही प्रासंगिक।
यूँ ही खुला छतरी मुख, जैसे कोई अधपका कौतुक
अनुवाद करना भी शायद अप्रासंगिक।
शून्य से उधार ली गई गर्मी से उबलता हुआ दूध जिसके लिए, उसकी अतिरिक्त
उँगली के प्रति वैसे मुझे कोई दया नहीं। संभवतः अप्रासंगिक।
अकेले भोगी हुई तरल जिम्नास्टिक। सारे निवारण आसन
वातायनविमुख। अप्रासंगिक?
प्रासंगिक–अप्रासंगिक
भावना से कुछ आगे की डायलेक्टिक
शायद डायलेक्टिक नहीं, डाइकोटमी।
इन सब तत्वों को छोड़ो, उरुखा-उरुका होने पर भी
हो जाए विवाह, गोरैया एक ताम्बूल दो
एक ही छतरी, छतरी की सर्दी
वह उसी परत में बनी रहे।
*चकलंग– असम में आहोम लोगों द्वारा दूल्हा और दुल्हन के विवाह में अंतिम मिलन का समारोह मनाया जाता है।
*उरुका—बिहू उत्सव का पूर्ववर्ती दिन
2. नाशपाती
मूगामुग्ध जुल्फें सारश्वत माप से कुछ लम्बी होने से ही मैं न्यूटन नहीं बन गया।
गिरने वाला फल नाशपाती ही,सेब नहीं। किस्से का आदियुग नवजागरण की तरफ जाता
संभवतः साही की पीठ भी मुलायम होती। मैं अथवा अन्य कोई लोभातुर
अधपके नाशपाती को टहनी तक चबा जाता। मानसिक स्वास्थ्य उन्नत होने पर
“होता होता”यह बकवास नहीं करता।
कल रात सेंध लगाने पर पता चला सीता का पसंदीदा फल भी नाशपाती।
गोलकीय कवि की उर्मिला सीता से बढ़कर सती।
मरुस्थल से दौड़कर आया साही मगर कोंपल में ही बंदी।
(इतना अतीत-प्रेम ठीक नहीं, कम से कम उपेक्षा किये बगैर निर्माण करता हूँ)
नाशपाती अभी भी अधपका ही है। एक संभाव्य भाषा के
भूतपूर्व शब्दकोश में है नाशपाती का अलग मतलब–
नाच पति:(वि) एक फेमिनिस्ट फल।
*असमिया में नाशपाती को नाचपति कहा जाता है।
3. द लॉस्ट लेटर
अंतिम पाठ ग्रहण करने के दो दिन बाद ही मृत्यु को प्राप्त हुए फ्रांज ने
एक दशक के बाद ऑस्ट्रिया में उसी नाम से पुनः जन्म
लिया। वह अच्छी कविताएँ लिखना चाहता था। एम. हेमेल के
दूर के रिश्तेदार भाई रिल्के को कई पत्र लिखे थे।
रिल्के ने भी पत्रों के उत्तर दिए थे। एक बार एक पत्र में फ्रांज ने
पूछा था, “सर, लेखकों का वर्गीकरण किया जा सकता है?”
जिस पत्र में रिल्के ने इसका उत्तर दिया था, दुर्भाग्यवश शायद
डाकिये की लापरवाही के चलते फ्रांज के हाथों तक नहीं पहुँचा। वह छपा
भी नहीं। बाद में उत्तर सामाजिक पुरातत्त्व विभाग के
प्रयास से बादल भंडार से बरामद हुआ। अन्य पत्रों की तुलना में
पत्र बहुत ही संक्षिप्त था।
स्टॉकहोम, स्वीडन
क्रिसमस की पूर्व संध्या, 1909
श्रीमान काप्पुस, शुभ क्रिसमस। कुछ व्यस्तता के कारण तुम्हारे
प्रश्न का उत्तर संक्षेप में दे रहा हूँ। दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।
एक: लेखनी से बने लेखक, दो: पदवी से बने लेखक।
लेखनी से लेखक बनो।
तुम्हारा
राइनर मारिया रिल्के
4. चींटी बेतार
लाई साग के बीच-बीच में लफा साग की एक डाली…
कल आशीर्वाद में टूटे हुए बालों को ढूँढ़ने से क्या होगा?
बहुत अधिक रुआंसी धूल जूतों के नीचे की संगतराशी को विकृत करेगी
बहुत अधिक मेरा शरीर किसी विशाल फूल की तरह महकेगा
बहुत अधिक काला ज्वार से एक वनस्पति-विज्ञानी की मृत्यु होगी
बिना वर्तनी-भ्रांति के ‘काला’ में कला बचा रहेगा
संगतराशी देखने के लिए चींटी-पर्यटकों का आगमन होता ही रहेगा
पहले बिंदु से दूसरे बिंदु तक लाई-फूल की गंध फैलते ही
आपकी स्थिति टूटकर ऐसी हो जाएगी—LIE-U-TEN-ANT
(झूठ–तुम–दस–चींटियाँ)
इस अभिधा से छेड़ना कठिन नहीं होगा
वृत्त के केंद्र को वृत्त से बाहर उठा दिया जाए
तो वृत्त में कितने कोण रहेंगे? एक कोने में थकी हुई रस्सी का टुकड़ा पड़ा रहेगा
रस्सी बटोरते ही बेतार बज उठेगा
सब निश्चित हो जाएंगे कि मेरा मस्तिष्क भी तारहीन है
(मैं फिर भी उसे वीणा का तार ही समझूँगा)
भावना का यह स्नायु-वादन इतना ऊँचा होगा कि MAU-PASS-ANT का
मधुछत्ता बिखर जाएगा।
भावना का यह स्नायु-वादन इतना तीव्र होगा, मैं ही भूल जाऊँगा
मैं तो बस एक कहानी पढ़ रहा हूँ।
टिप्पणी-MAU-PASS-ANT- मोपासां
डेथ ओवर
- यॉर्कर
जहाँ दीवार और फर्श एक हो जाते हैं
और बन जाते हैं चुम्बन का रूपक
उँगली चिमटी छोडकर बहा कुछ
इतना निस्पंद कि तुम दीवार के पार खाखरा की तरह सो सकते हो।
और नींद काट सकती है आदम की घास
2. फ्लाइट
विमान जानता है क्या इतने लोग
बिना उड़े ही उड़कर चले जाते हैं
खिड़की का पंख देखने पर ही लगता है
हम एक उड़ते अँधेरे के कब्जे में हैं
संयोग विच्छिन्न
3.फिर यॉर्कर
धरती से कितनी छोटी एक गेंद चरण स्पर्श करती है
पूरी दुनिया सीख ले यह शिष्टता
4.स्लो बाउंसर
एक पुरानी घड़ी की तरफ देखते हुए ऐसा लगता है क्या
अचानक छिटक सकता है एक काँटा
अपत्य मोह के कारण थोड़ा विलंब भी हो सकता है
5.ऑफ कटर
“अतिथि देवो भव” और
अनजानी लकड़ी के ठूँठ के बीच
तिनके का अंतर
6.लेग कटर
दुनिया का प्रत्येक कवि एक एक कंगारू
परिपक्व होने तक नवजात को भीतर ढोता है
कविता जैसा एक निष्पाप मुखड़ा
दूसरे जन्म के लिए उत्सुक
दूसरे जन्म के लिए एक बार मृत्यु अनिवार्य है क्या ?
अनुवाद: दिनकर कुमार
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अंकुर रंजन फुकन
असमिया कवि। वे लगभग हर प्रमुख असमिया पत्रिका में कविताएँ लिखते रहे हैं। उन्हें अपनी कविताओं की पांडुलिपि, ‘ৎ’ (ह्रसंता ता) के लिए प्रतिष्ठित ‘मुनिन बरकोटोकी साहित्य पुरस्कार, 2019’ से सम्मानित किया गया था। बाद में, उसी वर्ष (2019) यह पांडुलिपि एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई। ‘भुरमन चेलेउबांग’ (2023) इस कवि का एक और उल्लेखनीय कविता संग्रह है। उन्होंने हम्पाना की महाकाव्य कविता (कन्नड़) ‘चारु-वसंत’ का असमिया में अनुवाद किया, जो 2025 में प्रकाशित हुआ। असमिया की प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं और समाचार पत्रों के अलावा, उनकी कुछ कविताओं का हिंदी और बांग्ला अनुवाद प्रकाशित हुआ है। उन्होंने 2021 से 2023 तक गोगामुख कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।

