शख़्सियत-Portrait

विश्वकप फुटबॉल- असमिया
नीलिम कुमार भारतवर्ष, तुम्हारा एक हाथ काटा हिंदू ने एक पैर काटा मुसलमान ने विश्वकप फुटबॉल कैसे खेलोगे भारतवर्ष? हे भारतवर्ष खेल सकते थे तुम भ्रष्टाचार का विश्वकप खेल सकते थे तुम हिंसा-लूट। गुजरात गुजरात तुम तो कप्तान बन सकते थे। खेल सकते थे सांप्रदायिकता का विश्वकप, सांप्रदायिक भक्तों का प्रैक्टिस खत्म हुआ क्या? पूछो। पूछो सपने में भी सोने के बूट जूते देखने का अधिकार नहीं तुम्हारी संतान को हे भारतवर्ष, हम कितने दुर्भाग्यशाली हैं! किसने निकाल लिया हमारे सीने से हर्ष किसने छीन लिए हमारे खेल के वस्त्र? हम भी तो खेलते थे चकोतरा फीफा क्या तुम यह जानते हो बिल्कुल ब्राज़ील की तरह! ब्राज़ील अब बहुत दूर निकल गया कितनी दूर गया वो चकोतरा टीवी के पर्दे पर समझ नहीं आता... फिर भी विश्वकप फुटबॉल देखने जाऊँगा...
मधुसूदन आनन्द की प्रतिनिधि रचनाएँ
मधुसूदन आनन्द जी हमिंगवर्ड के प्रेरणास्त्रोत और मार्गदर्शक हैं। हमारे साथ हमिंमवर्ड को लेकर वह काफ़ी उत्साही थे। हालांकि वे इस साइट को अस्तित्व में आते नहीं देख सके, लेकिन वे हमारी टीम का अभिन्न हिस्सा हैं। हमारी आशा है हमिंगवर्ड और हमारी टीम उनके बताये रास्तों पर चलकर बेहतर काम कर पाए।
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