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यात्रियों को नहीं मिलते ठहरे हुए लोग
यात्रियों को नहीं मिलते
ठहरे हुए लोग.
यात्रियों को यात्री ही मिलते हैं.
वे मिलते हैं
जैसे खिड़की मिलती है बारिश से
या रेल मिलती है
स्टेशन से.
वे मिलते हैं
भीड़ में टकराते कंधों की तरह.
इसलिए
कभी-कभार किसी छुअन की याद के अलावा
कुछ नहीं ठहरता.
यात्रियों को यात्री ही मिलते हैं.….
2. आंसुओं से आएगी प्रलय
आंसू पीकर बड़े हो रहे बच्चों को
नहीं भाएगा सादा पानी
धमाकों की आवाज के आदी बच्चों के लिए
कितना भिन्न होगा शांति का मतलब
रोज अपनों के जनाजे देखते बच्चे
किसे मानेंगे सामान्य जीवन
भूखे रूखे बच्चे
सुबकते सहमे बच्चे
ये जो भय है
बच्चों के आंसुओं से आएगी प्रलय
ये तय है…
3. उमर खालिद के नाम
जेल में रहते रहते,
युवक से आदमी हो चुका
वो शख़्स एक सज़ा है,
उन अपराधों की,
जिनकी फ़ेहरिस्त उसकी पेशियों की गिनती से कहीं ज़्यादा लंबी है।
इतनी लंबी कि,
यहाँ पूरी दी नहीं जा सकती
क्योंकि मुझे ऑफिस जाना है।
वैसे ये भी एक अपराध है
कि जब वो जेल में मज़े से रोटियाँ तोड़ रहा है
और लेनिन-मार्क्स पढ़ रहा है,
तब मुझे बॉस की खरखराती ईमेल का जवाब देना है।
आईफोन्स पर रील देखना,
सोशल मीडिया पर लंबी-लंबी फेंकना,
संसद की बहसों पर बहसना,
बयानों पर उबलना,
आँकड़ों पर कहसना,
कोल्डप्ले की टिकटों पर खबरें पढ़ना,
आज़ादी के लिए नए-नए नारे गढ़ना
ये सब भी उसकी पेशियों की फेहरिस्त से लंबी अपराधों की सूची में शामिल हैं।
हो सकता है
खाने के बाद टहलना
रूस और इस्राएल के हमलों पर दहलना
बच्चों के स्कूल की फिक्र करना
और बढ़ते टैक्स से डरना
भी अपराधों में शामिल हों,
क्योंकि सूची अभी बन रही है
लेकिन चार्जशीट में निश्चित रूप से शामिल हैं
नेटफ्लिक्स पर बहकना
मोदी का मजाक उड़ने पर चहकना
वॉटर लॉगिंग की वीडियो पर एंग्री इमोजी बनाना
और वीकेंड गेटअवे के किस्से सुनाना
पर ये मामूली धाराओं के मामूली अपराध हैं
उन अपराधों के मुकाबले
जिनमें काफी कम सजा हुई है
जैसे कि फादर स्टैन स्वामी और प्रोफेसर साईंबाबा की हत्या
या संजीव भट्ट की गिरफ्तारी
या वे 16 लोग जिनके पूरे नाम लेना इतना मुश्किल था कि हमने उन्हें बीके16 में समेट दिया।इन अपराधों की सजा झेलते हम
और जेल की रोटियां तोड़ते तुम
अनुलोम विलोम हैं
कैद में लिखीं कविताएं बेदम हैं
कहानियां कम हैं
तुम स्वतंत्र हो
जेल में तो हम हैं।।….
4. मैंने कहा, मैं हिंदू
मैंने कहा, मैं हिंदू
और मैं मुसलमान, बौद्ध, सिख, ईसाई, यहूदी, शिंतो, जोरोस्त्रियन, ताओ, बहाई, जैन
कितना कुछ नहीं रहा।
मैंने कहा, मैं भारत का
और 194 देशों ने मुझे विदेशी कर दिया।
मैंने कहा, मैं मर्द
और सेकंड, थर्ड, फोर्थ… जाने कितने जेंडर
मुझे परायेपन से देखने लगे।
मैंने कहा, मैं ब्राह्मण
और एकदम में कितनों के पाले से बाहर हो गया.
जबकि आईने में मैं उन सब जैसा ही दिखता था
फिर मैंने कहा, मैं इंसान
और कोई मुझसे जुदा होने का भेद नहीं खोज पाया.…
5. 6 दिसम्बर
यह एक काला दिन था
6. मेनिफ़ेस्टो
अंधेरे में जो चमकते कण
नजर आ रहे थे
वे दरअसल, सूरज की
रोशनी की कोशिश का अंजाम थे
जिसे धूल ने अपने आगोश में
ले रखा था
यह धूल उड़ी थी
इंसानों को रौंदकर निकले
जानवरों के कदमों से
दूर से देख रहे लोग चमकती
धूल को देखकर आह्लादित थे आनंदित थे
उन्हें रौंदे गए लोगों की
चीत्कार सुनाई नहीं दे रही थीं
क्योंकि हर ओर उन जानवरों की आवाजें थीं
जो इंसानों को रौंद कर
बढ़ रहे थे
हवा में बसी खून की महक
उन तक नहीं पहुंच रही थी
क्योंकि उन्हीं के बीच के कुछ लोग
जानवरों से समझौता किए बैठे थे
और उड़ा रहे थे, हवा में इत्र
पूरी गहमा गहमी में
सिर्फ चमकती धूल का जिक्र था
जबकि अंधेरे को धूल के बैठ
जाने का इंतजार था
क्योंकि वह एक काला दिन था
जो एक बहुत काली रात की
तरफ बढ़ रहा था।।
तानाशाह बनते ही
मैं करवा दूँगा बिछड़े प्रेमियों की शादियाँ।हरेक को करना होगा प्रेम
और बिछड़ना अवैध माना जाएगा।जन्मना ज़रूरी नहीं होगा
पर जन्मने के बाद भी
न जीने पर देना होगा जज़िया।मेरी यात्राओं से पहले
शहरों में रोपे जाएँगे गुलमोहर
और गाए जाएँगे उदास गीत।नौकरी माँगने वालों से माँगा जाएगा
भरपूर नींद लेने का प्रमाण-पत्र
और नौकरी देने वालों को तनख़्वाह के अलावा
देनी होगी रोटी और खीर।मैं जानता हूँ कि
तुम इसे बेवक़ूफ़ी कहते हो
पर मैं इसे कहता हूँ ख़्वाब
और माँगता हूँ वोट
मुझे एक दिन के लिए तानाशाह चुन लो।
विवेक आसरी
पत्रकार, लेखक, कहानीकार और फिल्मकार हैं. उन्होंने 2003-04 में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन से पढ़ाई करने के बाद 2004 में नवभारत टाइम्स, दिल्ली के साथ पत्रकारिता की शुरुआत की. उसके बाद से वह भारत, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं.
साथ ही, उन्होंने कई नाटक लिखे और निर्देशित किए, कई फिल्में बनाई और उनके लिए पुरस्कार पाए और कविता-कहानी लेखन में भी सक्रिय रहे. फिलहाल वह जर्मनी में रहकर डॉयचे वेले हिंदी से जुड़े हैं.

