कविता कर्मकार की कविताएँ- असम

  1. युद्ध

बाँटा तो यू बाँटा
न अलग रहे न मिल पाए !
युद्धोन्माद कभी युद्ध में नहीं जाते!!
बस मृत्यु पर हर्षोल्लास करते ठहाके लगाकर !

असल युद्ध तो वो लड़ते है
जिन्हें आस रहती है कि युद्ध कभी ना हो !
जो चिट्ठियों में लपेटकर प्यार भेजते है राखी की डोरी में !
विरह के अगन में झुलसी प्रीत को एक चाँद को देखकर दिल बहलाते !

अनायास बहती अश्रुधारा को व्यर्थ छुपाते !
बेचैनी और शंका के भँवर में बस डूबते हैं और डूबते चले जाते!

राजनीति के हथकारीता (?) को बीन(?) समझे नियति मान लेते !

असल युद्ध तो उनका होता है
जिनके लिए बारूद बस रोटी का अंतिम साधन बनता !
असल युद्ध वहा होता है
दबी स्वर से प्रार्थना गूंजती है जिन प्रार्थना गृहों में
सिसकते हिमखंड पिघलते पिघलते ख़त्म न होती

अथवा यू मानें
किसी की प्रतीक्षित कुशल वार्ता में
बेबसी बेचैनी जहा बेबाक होती

युद्ध उनका होता है
जो अंदर से टूट बिखर के भी हौसला बनता है

हौसले होते है पोशीदा
कपाल में रेखांकित उम्र भर की प्रौढ़ता

काँटे बिखेरती सरहदें
जो केवल ख़ून माँगती
वहाँ संहार से अधिक होता क्या है !

2. इतिहास

शिरीष की जड़ों में
दफ़्न है हमारा इतिहास
दिल में निचोड़ दी गई है
चाय-पत्तियों की सुगंध
मुझे बधिर बनाती हैं
शोषित प्रताड़ित पूर्वजों की आर्त आवाजें

सम्भोग और निद्रा के हर पल
भूख की ज्वाला में जलकर राख हो जाते हैं
इतिहास में
मार्क्स , लेनिन अथवा बुद्ध की ज्ञान दीक्षा
दुर्बोध थी उस काल में

उनमें प्रतिवाद के पन्ने
कोरे ही रह गये
अथवा किसी ने भी नहीं खाया
ज्ञान वृक्ष का कोई फल

एक दिन …
गंदी नालियों के कीड़ों की तरह
प्रवाहित जीवन-यापन से
अँधेरा मिटेगा
पेड़ों में रोशन होगा चिड़ियों का घोसला
गीत गाये जायेंगे भोर के
यातना और भूख से मिलेगी मुक्ति
इतिहास के पन्ने भरे जायेंगे
नयी कहानियों से
कुछ आप लिखेंगे
कुछ हम लिखेंगे

चाय का रंग लाल लाल और लाल
हम सबके ख़ून का रंग एक है
भूख की भी होनी चाहिए एक ही संज्ञा
तब मेरी तरह हाहाकार नहीं करेगा कोई
पूर्वजों की कब्र पर
लिखे गए उन मिथकों को याद करके !

कविता कर्मकार
शिवसागर, असम
कविताओं के साथ-साथ कहानीकार और अनुवादक भी हैं । असमिया,हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में समान अधिकार से लिखती हैं और वे अंतर्भाषाई अनुवाद कार्य करती हैं । असमिया भाषा में दो कविता संग्रह प्रकाशित,  बंगाली में एक संग्रह का अनुवाद भी प्रकाशित हैं । अभी तक उन्होंने बत्तीस पुस्तकों का अनुवाद किया है जो नेशनल बुक ट्रस्ट अफ इंडिया और साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित हैं ।
असमिया कविता के लिए ‘बंशी गोगोई मेमोरियल अवार्ड 2010’ से सम्मानित किया गया है । लघु कहानी के लिए ( असम ट्रिब्यून समूह ) के लिए गरिमामय ‘गरियोसी चंद्र प्रसाद सैकिया ‘ लघु कहानी प्रतियोगिता में दुसरा स्थान मिला और सम्मानित हुए ।लखनऊ से ‘अंतरराष्ट्रीय तथागत सृजन सम्मान’ प्राप्त करने के साथ साथ 2023 में ‘जनकवि मुकुट बिहारी सरोज सम्मान’ से सम्मानित हुए ।
सम्पर्क सूत्र – karmakarkavita@gmail.com

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