शख़्सियत-Portrait

क्या पढ़ना कहानी लिखना सिखा सकता है?

क्या पढ़ना कहानी लिखना सिखा सकता है?

सुधांशु गुप्त प्रिय युवा लेखक महोदय आपका मेल मिला। दूसरा मेल। पढ़कर अच्छा लगा कि आपके भीतर पढ़ने का एक  जुनून है। आप ख़ूब पढ़ते हैं। मुझे यह बात इसलिए भी अच्छी लगी क्योंकि अब पढ़ना भी एक निरर्थक-सा काम होता जा रहा है। बहुत से लेखकों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वे इसलिए किसी और का लिखा नहीं पढ़ते क्योंकि इससे उनके लेखन पर असर पड़ता है। शायद वे यह कहना चाहते हैं कि अधिक लेखकों को पढ़ने का असर उनके लेखक पर भी आ जाता है, उनकी मौलिकता नष्ट हो जाती है। हो सकता है उनका कहना सही हो(लेकिन पहले यह भी तो देखा जाना चाहिए कि वे  कितने मौलिक हैं)। लेकिन इस बात को यहीं छोड़ते हैं। मुख्य बात पर आते हैं। आपने...

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